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कितना खुदगर्ज हो गया है ये इंसान

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कितना खुदगर्ज हो गया है ये इंसान
राह में चलते रुस्वाइयों को देख कर
मुह मोड़ लेता है ये इंसान
जब घटती है घटना अपनों के साथ
तो रो – रो के दुसरो से
मदद की गुहार लगाता है ये इंसान
कितना खुदगर्ज हो गया है ये इंसान
काश दुसरो को भी अपने ही तरह समझता
राह चलते राहगीरो कि मदद करता
तो कितना अपनापन सा लगता
न जाने क्यों इतना खुदगर्ज हो गया है ये इंसान
मदद करता मदद करने कि सलाह देता
तो फिर कितना अच्छा होता
होता एक अखंड भारत का निर्माण
काश इंसान दुसरो को भी अपने ही तरह समझता
न जाने क्यों इतना खुदगर्ज हो गया है ये इंसान
अगर खुदगर्ज न होता तो कितना अच्छा होता
होता एक अखंड भारत का निर्माण
जय हिन्द जय भारत …. जय हिन्द जय भारत
जय हो भारत कि हिन्द सेना

Life Style

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जब बचपन था, तो जवानी एक ड्रीम था… 


जब जवान हुए, तो बचपन एक ज़माना था… 


जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी…आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है… 


कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था… आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है… 


स्कूल में जिनके साथ ज़गड़ते थे, आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते है… 


ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है… 


बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है… 


काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल…काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार…!!